CBSE Board New Rules: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2026 से बोर्ड परीक्षाओं से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में बदलाव किया है। इन नए नियमों का उद्देश्य छात्रों को बेहतर अवसर देना और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। इस साल लगभग 50 लाख से अधिक छात्र 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुए हैं। जहां 10वीं की पहली चरण की परीक्षाएं 11 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी हैं, वहीं 12वीं की परीक्षाएं 10 अप्रैल 2026 तक जारी रहेंगी।
पहले चरण की परीक्षा खत्म होने के बाद अब छात्रों के सामने दूसरी बोर्ड परीक्षा का विकल्प भी मौजूद है। इसके साथ ही रिजल्ट आने के बाद उत्तर पुस्तिका की जांच और पुनर्मूल्यांकन से संबंधित नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। इन सभी बदलावों के बारे में परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने कई अहम जानकारी साझा की है।
दूसरी बोर्ड परीक्षा का उद्देश्य और समय
CBSE ने छात्रों को अपने अंकों में सुधार का अवसर देने के लिए दूसरी बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था की है। यह परीक्षा मुख्य रूप से उन छात्रों के लिए है जो पहली परीक्षा में प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं और अपने परिणाम को बेहतर बनाना चाहते हैं।
संभावना है कि कक्षा 10 की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से 1 जून 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। हालांकि, इसकी आधिकारिक तारीखें और पूरा शेड्यूल पहली परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद बोर्ड द्वारा जारी किया जाएगा।
रिजल्ट आने के बाद छात्र और अभिभावक CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर दूसरी परीक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया
दूसरी परीक्षा के लिए छात्रों को अलग से कोई नया आवेदन फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी। यदि किसी स्कूल ने सितंबर 2025 में LOC (List of Candidates) जमा करते समय दोनों परीक्षाओं की फीस जमा कर दी थी, तो ऐसे छात्रों का पंजीकरण पहले से ही हो चुका होगा।
इसका मतलब यह है कि जिन छात्रों के लिए पहले ही फीस जमा की जा चुकी है, वे बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम रिजल्ट जारी होने के बाद घोषित किया जाएगा।
दूसरी बोर्ड परीक्षा देने के लिए जरूरी नियम
CBSE ने दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए कुछ स्पष्ट नियम तय किए हैं, जिन्हें सभी छात्रों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी छात्रों को पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा। पहली परीक्षा दिए बिना कोई भी छात्र दूसरी परीक्षा का विकल्प नहीं चुन सकता।
पहली परीक्षा में पास होने वाले छात्र अपने अंकों में सुधार के लिए अधिकतम तीन मुख्य विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकते हैं। इन विषयों में विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाएं शामिल हैं।
यदि छात्र दोनों परीक्षाओं में शामिल होता है, तो अंतिम मार्कशीट में वही अंक दर्ज किए जाएंगे जो अधिक होंगे। इस व्यवस्था से छात्रों को अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।
हालांकि एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों में अनुपस्थित रहता है, तो उसे दूसरी परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलेगी।
रिजल्ट के बाद री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया
बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद कई बार छात्रों को अपने अंकों को लेकर संदेह या असंतोष होता है। ऐसे मामलों में CBSE छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका की जांच कराने के लिए तीन अलग-अलग विकल्प प्रदान करता है।
पहला विकल्प है उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करना। इस प्रक्रिया के माध्यम से छात्र अपनी लिखी हुई कॉपी को देखकर समझ सकते हैं कि उन्हें किस प्रकार अंक दिए गए हैं।
दूसरा विकल्प है मार्क्स वेरिफिकेशन। इसमें यह जांच की जाती है कि उत्तर पुस्तिका में अंक जोड़ने या दर्ज करने में कोई गलती तो नहीं हुई है।
तीसरा विकल्प है री-इवैल्यूएशन, जिसे वास्तविक पुनर्मूल्यांकन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिका के उत्तरों का दोबारा मूल्यांकन किया जाता है।
री-चेकिंग के लिए निर्धारित फीस
उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए छात्रों को प्रति विषय 500 रुपये का शुल्क देना होगा। यह फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से ही जमा की जा सकती है।
यदि छात्र री-इवैल्यूएशन करवाना चाहता है, तो उसे थ्योरी पेपर के प्रत्येक प्रश्न के लिए 100 रुपये का भुगतान करना होगा। इस प्रक्रिया के लिए आवेदन भी पूरी तरह ऑनलाइन करना होगा।
यदि आवेदन अधूरा होगा या ऑफलाइन जमा किया जाएगा, तो उसे सीधे रद्द कर दिया जाएगा। इसके अलावा जमा की गई फीस किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं की जाएगी।
क्या री-इवैल्यूएशन में अंक बढ़ना तय है?
अक्सर छात्र और अभिभावक यह मान लेते हैं कि री-इवैल्यूएशन करवाने से अंक जरूर बढ़ जाएंगे। लेकिन CBSE ने स्पष्ट किया है कि ऐसा जरूरी नहीं है।
पुनर्मूल्यांकन के दौरान अंक बढ़ भी सकते हैं, घट भी सकते हैं या फिर पहले जैसे ही रह सकते हैं। यह पूरी तरह से उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन पर निर्भर करता है।
डॉ. संयम भारद्वाज के अनुसार कई बार ऐसा भी होता है कि अंक कम होने के बाद अभिभावक बोर्ड से अनुरोध करते हैं कि पहले वाले अंक ही रहने दिए जाएं। लेकिन नियमों के अनुसार एक बार री-इवैल्यूएशन पूरा हो जाने के बाद जो भी अंक निर्धारित होते हैं, वही अंतिम माने जाते हैं और उन्हें बदलने की कोई अनुमति नहीं होती।
नकल करने वाले छात्रों के लिए सख्त नियम
CBSE ने परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए भी नया नियम लागू किया है। पहले ऐसा होता था कि यदि कोई छात्र किसी विषय में नकल करते हुए पकड़ा जाता था, तो उस विषय की परीक्षा रद्द कर दी जाती थी। इसके बावजूद छात्र अतिरिक्त विषय के अंकों के आधार पर पास हो जाता था।
अब यह सुविधा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
परीक्षा नियंत्रक के अनुसार वर्ष 2025 में कक्षा 10 के कुल 608 छात्र नकल करते हुए पकड़े गए थे। इनमें से 388 छात्र अतिरिक्त विषय के कारण पास हो गए थे।
अब नए नियम के तहत यदि कोई छात्र नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे उस विषय में कंपार्टमेंट श्रेणी में रखा जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि छात्र को उसी विषय की परीक्षा दोबारा देनी होगी।
नए नियमों का छात्रों पर प्रभाव
CBSE के इन नए नियमों से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और अनुशासित बनाने की कोशिश की गई है। दूसरी बोर्ड परीक्षा की सुविधा छात्रों को अपने अंकों में सुधार का अवसर देती है, जबकि री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया उन्हें अपनी कॉपी की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाती है।
इसके साथ ही नकल के मामलों में सख्ती लाने से परीक्षा की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। इन सभी बदलावों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को निष्पक्ष और बेहतर शिक्षा व्यवस्था प्रदान करना है।













